कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१—२०२३ poet  ·  1951—2023 कवयित्री  ·  १९५१—२०२३
Kalpana Ramani

कवयित्री  —  गीतकार  —  ग़ज़लगो poet  —  songwriter  —  ghazal-writer कवयित्री  —  गीतकार  —  ग़ज़लगो

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

६ जून १९५१ · २७ दिसम्बर २०२३ 6 June 1951 · 27 December 2023 ६ जून १९५१ · २७ दिसम्बर २०२३

गीत, ग़ज़ल, दोहा, कुण्डलिया और कहानी — सात पुस्तकें, छह सौ से अधिक रचनाएँ, और एक ऐसा स्वर जो उज्जैन की धरती से नवी मुंबई के क्षितिज तक जाकर भी कभी थका नहीं। Geet, ghazal, doha, kundaliya and short story — seven books, six hundred-plus writings, and a voice that travelled from the soil of Ujjain to the skyline of Navi Mumbai and never tired. गीत, ग़ज़ल, दोहो, कुंडलिया ऐं कहाणी — सत किताबूं, छह सौ खां वधीक रचनाऊं, ऐं हिक एडी आवाज़ जा कडहिं न थकी।

मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी —
उम्र भर, साँसें रहेंगी जब तलक।
main ghazal kahti rahoongi —
umr bhar, saansein rahengi jab talak.
माँ ग़ज़ल चवंदी रहंदस —
उमिर भर, साह रहंदा जिते ताईं।

उन्हें प्रकाश प्रिय था — सूर्य की किरण से लेकर क़लम की रौशनाई तक। She loved light — from the sun's first ray to the gleam of ink on paper. हुनन खे प्रकाश पियारो हो — सूरज जी किरण खां क़लम जे रौशन ताईं।

आज की रचना Today's verse अजि जी रचना

कहानी Story कहाणी

आसमान भी रोता होगा aasamaan bhee rotaa hogaa आसमान भी रोता होगा

सुविधानन्हें सुजान को गोद में लिए कमरे की खिड़की से एकटक आसमान को निहार रही थी किअचानक एक तारा टूटकर शून्य में विलीन हो गया. घबराकर सुविधा ने बेटे को अपनीबाँहों में भींच लिया और उसे बेतहाशा चूमने लगी. suwidhaananhen sujaan ko god men lie kamare kee khidakee se ekatak aasamaan ko nihaar rahee thee kiachaanak ek taaraa tootakar shoony men wileen ho gayaa ghabaraakar suwidhaa ne bete ko apaneebaanhon men bheench liyaa aur use betahaashaa choomane lagee सुविधानन्हें सुजान को गोद में लिए कमरे की खिड़की से एकटक आसमान को निहार रही थी किअचानक एक तारा टूटकर शून्य में विलीन हो गया. घबराकर सुविधा ने बेटे को अपनीबाँहों में भींच लिया और उसे बेतहाशा चूमने लगी.

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"साँसें थम भी जाएँ — शब्द कभी नहीं थमते।
वे रहती हैं, जैसे माँ की दुआ रहती है।"
"Saansein tham bhi jaayein — shabd kabhi nahin thamte.
Wo rehti hain, jaise maa ki dua rehti hai."
"साह बंद थी पवन — पर लफ़्ज़ कडहिं न बंद थी थिए।"

— पोते की कलम से, रोहन — from her grandson, Rohan — पोते जी क़लम सां, रोहन